anwer ghafiil

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मैं दिल को छोड़ आया हूँ कुचा-ए-यार मैं 
कुछ भी नहीं है अब तो मेरे इख्तियार में

चोखट पे उनके रहते हैं शाहो गदा फ़क़ीर
एसा क़रार मिलता है उनके दयारम में

छुकर बदन को उनके ये पानी ने दी सदा
तुम आग क्यों लगाते हो इस आबशार में

सुरज हूँ आन बान से निकलुगा सुबहो दम
जो छुप गया था वक्त की गरदो ग़ुबार में

ग़फ़िल शमाँ जलाते रहो इत्तेहाद की
वरना बढ़ेगी दुरयाँ इस इन्तशार में

(अनवर ग़ाफ़िल)

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ग़ज़ल 

ग़ज़ल की  गीत की रूबाइ की तरानों की
सुखनवरों ने रखी लाज सब ज़बानों की 

लबों की आँख के काजल की उसके  बालों की
नज़र ने पढ़ ही ली आखिर ज़बां इशारों की

जहाँ पे मिलते थे उलफत के कारवाँ आकर 
दिवार किसने  बनाई  वहां  चटानों की

चरा़ग मेने जलाऐ उसी मकाम पे फिर
जहाँ से खत्म हुई  रोशनी  मकानों की

मेरे परों  को भी  परवाज़  दे मेरे  मोला
कहानी  मेने  सुनी है .बहुत उडानों  की

सबब  यही  है ज़माने में उसकी पस्ती का
जो सुनके  बेठा है  देखो  सदा  अज़ानों

नज़र झुका के  कहां  देखते हैं  ये ग़ाफ़िल

खुदा समझता है  बस ये अदा दिवानों की

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ग़ज़ल 


शबाब  गुज़रा निशाने शबाब  बाक़ी है 
निगाहें यार में अब तक शराब बाक़ी है 

ज़ुबां से हो चुका दिल का ख़िताब बाक़ी है 
विसाले यार को आखिर जवाब बाक़ी है 

मचल रहीं हैं  मेरे दिल में हसरतें  यूँ  के
नकाब उठगया लेकिन हिजाब बाक़ी ही

मुझे ही देख के रूख पे नकाब डाला पर
निगाहे शोक़ में क्यूँ  इजतराब  बाक़ी  है 

नज़र का मिलना तो आग़ाज़े इश्क है ग़ाफ़िल

अभी तो  इश्क का पुरा  निसाब बाक़ी है


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ग़ज़ल 


क्या बताऊ के क्या लिया मेने
तुझको तुझसे चुरा लिया मेने

ज़िंदगी तुझको बसर केसे करू
ज़ख्म दिल से लगा लिया। मैंने

आज माँ ने मुझे  दुवाऐ  दी
आज सबकुछ कमा लिया मैंने 

उनके आने की आस टुटचुकी
एक दिया था बुझा लिया मेने

वो तस्सव्वुर में आ गऐ ग़ाफ़िल

फिर क़लम उठा लिया  में  ने

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ग़ज़ल 


वो जब से मेरी ज़िश्त के गमख़ार हो गए
पुरख़ार जो  थे  रास्ते  गुलज़ार  हो  गए

कुर्बान जाऊ आप का अन्दाज़े  गुफ्तगू
कज़्ज़ाक जो थे आज वो अबरार हो गए

ज़ुल्फें  बिखेरे आ गए वो  रात बाम पर
यूं  चाँद को फिर चाँद के दिदार हो गए


मिस्मार करने आए थे जो आशियाँ  मेरा
वो दुश्मन.ए.जाँ  देखो  मददगार  हो गए

उनके  लबों  ने शेर  मेरे  गुन गुनाऐ जब
मशहूर  मेरी  गज़लो के अश्आर हो गए 

माँ के शिकम मैं नन्नी सी बच्ची को मारकर

ग़ाफ़िल वो आज साहिबे किरदार हो गए

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